पश्चिम बंगाल का राज्य पक्षी — व्हाइट-थ्रोटेड किंगफ़िशर (किलकिला)
पश्चिम बंगाल का राज्य पक्षी व्हाइट-थ्रोटेड किंगफ़िशर — गहरा नीला-फिरोज़ी शरीर, चमकदार लाल चोंच और सफ़ेद गला। बंगाली में इसे 'माछरांगा' कहते हैं — 'मछली का रंगरेज़'।
पहचान
यह किंगफ़िशर लगभग 28 सेमी लंबा है — सिर, गर्दन का पिछला भाग गहरा भूरा-लाल, पीठ और पंख शानदार चमकीले फिरोज़ी-नीले, गला-छाती सफ़ेद, चोंच बड़ी और नुकीली लाल। उड़ान में सफ़ेद पंख-पैच स्पष्ट दिखता है।
आवास — सिर्फ़ मछली नहीं
नाम 'किंगफ़िशर' है, पर यह पानी से दूर भी रहता है — खेतों, बगीचों, पार्कों, और शहरी क्षेत्रों में भी। यह छिपकली, कीड़े, मेंढक, छोटे साँप, चूहे — सब खाता है। पश्चिम बंगाल की नदियाँ, तालाब, और सुंदरबन का मैंग्रोव — इसका आदर्श स्थल।
क्यों चुना गया
पश्चिम बंगाल ने इसे राज्य पक्षी घोषित किया क्योंकि — यह बंगाल के हर ज़िले में मिलता है, बंगाली कविता और साहित्य (रवीन्द्रनाथ ठाकुर से लेकर जीबनानंद दास तक) में 'माछरांगा' का ज़िक्र गहरा है, और नीले-लाल रंग बंगाली संस्कृति के प्रिय रंग हैं।
व्यवहार और शिकार
यह पोल, तार, या नीचे टहनी पर बैठकर ज़मीन देखता है। शिकार दिखते ही तीव्र ग़ोता मारकर पकड़ता है, फिर अपने बैठने की जगह पर लौटकर उसे पत्थर/टहनी पर पीट-पीटकर मारता है और निगलता है। शिकार-सफलता दर 40% के आस-पास है — पक्षियों में बहुत अच्छी।
कहाँ देखें
कोलकाता के रवीन्द्र सरोवर, सुंदरबन, गोरुमारा नेशनल पार्क, बकखाली की खाड़ी। शहरी बंगाल में भी बहुत आम — किसी भी पार्क में बिजली की तार पर बैठा दिख जाएगा।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
किंगफ़िशर की कितनी प्रजातियाँ भारत में हैं?
लगभग 12 प्रजातियाँ — जिनमें सामान्य किंगफ़िशर (छोटा नीला), पाइड किंगफ़िशर (काला-सफ़ेद), स्टॉर्क-बिल्ड (बड़ा) प्रमुख हैं। व्हाइट-थ्रोटेड सबसे व्यापक है।
क्या यह पानी में डुबकी लगाकर मछली पकड़ता है?
हाँ — लेकिन ज़्यादातर यह ज़मीन पर शिकार पकड़ता है। छोटे किंगफ़िशर पानी में डाइव करते हैं, व्हाइट-थ्रोटेड मुख्यत: 'सूखा' किंगफ़िशर है।
यह पक्षी बंगाली संस्कृति में क्यों प्रिय है?
रबींद्र-संगीत और नज़रुल गीति में 'माछरांगा' प्रेम, प्रतीक्षा, और अचानक कार्रवाई का प्रतीक है। नीला-लाल संयोजन बंगाली सौंदर्य-बोध में गहरा है।
दूसरे राज्यों के पक्षी
- राजस्थान — गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड)
- उत्तर प्रदेश — सारस क्रेन
- उत्तराखंड — हिमालयन मोनाल (मुनाल)
- पंजाब — मोर
- गुजरात — ग्रेटर फ्लेमिंगो (सुरख़ाब)
- असम — सफ़ेद पंख वाली बत्तख
- बिहार — गौरैया (हाउस स्पैरो)
- तमिलनाडु — ज़मरुदी कबूतर (एमराल्ड डव)
- कर्नाटक — इंडियन रोलर (नीलकंठ)
- मध्य प्रदेश — दूधराज (पैराडाइज़ फ़्लाईकैचर)
- महाराष्ट्र — हरियल (यलो-फ़ुटेड ग्रीन पिजन)
- केरल — मलाबार धनेश (ग्रेट हॉर्नबिल)
- आंध्र प्रदेश — पाल-पिट्टा (इंडियन रोलर)
- तेलंगाना — पाल-पिट्टा (इंडियन रोलर)
- ओडिशा — नीलकंठ (इंडियन रोलर)
- छत्तीसगढ़ — पहाड़ी मैना (हिल मैना)
- झारखंड — एशियन कोयल
- हिमाचल प्रदेश — पश्चिमी ट्रैगोपैन (जुजुराना)
- जम्मू और कश्मीर — काली गर्दन वाला सारस
- लद्दाख — काली गर्दन वाला सारस
- अरुणाचल प्रदेश — ग्रेट हॉर्नबिल
- नागालैंड — ब्लीथ ट्रैगोपैन
- मणिपुर — नोंगिन (मिसेज़ ह्यूम्स फ़ीज़ेंट)
- मेघालय — पहाड़ी मैना
- मिज़ोरम — मिसेज़ ह्यूम्स फ़ीज़ेंट
- त्रिपुरा — हरी शाही कबूतर
- सिक्किम — रक्त-लाल फ़ीज़ेंट (ब्लड फ़ीज़ेंट)
- गोवा — पीले-गले वाली बुलबुल (फ़्लेम-थ्रोटेड)
- हरियाणा — काला तीतर
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