संपादकीय नीति (Editorial Policy)
अंतिम अपडेट: 12 जुलाई 2026
BirdGyan (पंख कथा) पर प्रकाशित हर लेख एक तय संपादकीय प्रक्रिया से गुज़रता है। इस पृष्ठ पर वह पूरी प्रक्रिया, हमारे स्रोत, हमारे लेखक और त्रुटि-सुधार का तरीक़ा — सब पारदर्शी रूप से दर्ज है, ताकि पाठक हर तथ्य को स्वयं जाँच सकें।
1. हम कौन हैं और क्यों लिखते हैं
हम भारत में स्थित पक्षी-प्रेमियों, स्वतंत्र लेखकों और शिक्षकों की एक छोटी टीम हैं। हममें से कुछ ने ज़ुऑलजी/ पर्यावरण विज्ञान की स्नातक-स्तरीय पढ़ाई की है, कुछ लंबे समय से Bombay Natural History Society (BNHS), eBird और स्थानीय बर्ड-वॉचिंग समूहों के साथ फील्ड-वर्क कर रहे हैं। हमारा एकमात्र लक्ष्य है — भारतीय पक्षियों की प्रामाणिक जानकारी सरल हिंदी में हर पाठक तक पहुँचाना।
2. लेख कैसे बनता है — तीन-चरणीय प्रक्रिया
- अनुसंधान (Research): हर पक्षी पर कम-से-कम तीन प्राथमिक/द्वितीयक स्रोत पढ़े जाते हैं — IUCN Red List, Cornell Lab of Ornithology (Birds of the World / eBird), BNHS प्रकाशन, Zoological Survey of India, और स्थानीय राज्य-पक्षी विभाग की रिपोर्टें।
- लेखन (Original writing): हर लेख मूल रूप से हिंदी में लिखा जाता है — कोई मशीन-अनुवाद नहीं। सांस्कृतिक संदर्भ (लोककथा, धर्म-ग्रंथ, ऋतु-मान्यताएँ) को तथ्य से स्पष्ट रूप से अलग रखा जाता है ताकि पाठक भ्रमित न हो।
- तथ्य-जाँच (Fact-check): प्रकाशन से पहले हर वैज्ञानिक नाम, संरक्षण-स्थिति, आकार, आवास और आँकड़ा दो स्वतंत्र स्रोतों से मिलाया जाता है। लेख के अंत में स्रोत-सूची जोड़ी जाती है।
3. स्रोत जिन पर हम भरोसा करते हैं
- IUCN Red List — संरक्षण-स्थिति के लिए
- Cornell Lab — Birds of the World और eBird India — वितरण, आवाज़ और आवास
- Bombay Natural History Society (BNHS) — भारतीय अवलोकन-रिपोर्ट
- Zoological Survey of India — वर्गीकरण
- Wikimedia Commons — CC / Public Domain तस्वीरें (देखें मीडिया साभार)
Wikipedia का उपयोग हम केवल शुरुआती संदर्भ के लिए करते हैं — कोई भी दावा प्रकाशित होने से पहले ऊपर बताए प्राथमिक स्रोतों से पुष्ट किया जाता है।
4. मौलिकता की गारंटी (Originality)
- हर लेख मूल रूप से हिंदी में हाथ से लिखा जाता है — कहीं से कॉपी नहीं किया जाता।
- AI लेखन उपकरणों का उपयोग केवल व्याकरण-सुधार तक सीमित है; तथ्य-निर्माण के लिए नहीं।
- प्रकाशन से पहले हर लेख को Copyscape/मैनुअल जाँच से गुज़ारा जाता है।
5. सांस्कृतिक बनाम वैज्ञानिक दावे
मोर-नीलकंठ का शुभ-अशुभ, कौवे का पितृ-संदेश, उल्लू का लक्ष्मी-वाहन — ये सब सांस्कृतिक विश्वासहैं, जिन्हें हम आदरपूर्वक प्रस्तुत करते हैं। लेकिन ऐसे किसी भी दावे के साथ हम स्पष्ट लिखते हैं कि यह लोकमान्यता है, वैज्ञानिक तथ्य नहीं। पक्षी-विज्ञान (Ornithology) के तथ्य अलग खंड में दिए जाते हैं।
6. त्रुटि-सुधार नीति (Corrections)
अगर आपको किसी लेख में कोई भी तथ्य-त्रुटि, टूटा लिंक, या भ्रामक सूचना दिखे — कृपया hello@birdgyan.life पर लिखें या संपर्क पृष्ठ देखें। हम 48 घंटे के भीतर जाँच करते हैं और सुधार प्रकाशित होने पर लेख के ऊपर “अंतिम अपडेट” की तिथि बदल दी जाती है। बड़े संशोधनों की सूचना लेख के अंत में “सुधार-लॉग” के रूप में दर्ज होती है।
7. विज्ञापन और प्रायोजित सामग्री
BirdGyan मुख्यतः Google AdSense जैसे प्रोग्रामैटिक विज्ञापन नेटवर्क से चलता है। हम कोई प्रायोजित लेख (Sponsored posts) प्रकाशित नहीं करते जो पक्षी-कल्याण या वैज्ञानिक तथ्य को प्रभावित करे। यदि किसी लेख में कोई एफ़िलिएट लिंक हो, तो उसे स्पष्ट रूप से चिन्हित किया जाएगा।
8. संपर्क
संपादकीय प्रश्न, तथ्य-सुझाव, कॉपीराइट-सूचना या सहयोग के लिए — hello@birdgyan.life. हम 48 घंटे में उत्तर देने का प्रयास करते हैं।