हर पक्षी, हर कहानी — हिंदी में, भावना के साथ।
66 में से 66 कहानियाँ
जब वह अपने पंख फैलाता है, समय जैसे रुक जाता है — पर क्या आप जानते हैं उसके पीछे की असली कहानी?
दशहरे की सुबह जिसे एक झलक देखना भी पुण्य माना जाता है — पर क्या आपने उसे ध्यान से देखा है?
एक नीली बिजली पानी में कूदी — और सेकंड भर में मछली लेकर लौट आई।
उसकी 'कुहू-कुहू' सुनकर हर कवि कविता लिखने बैठ जाता है — पर असल में वह माँ कौवा को धोखा दे रही होती है।
जिसे आपने बचपन में आँगन में फुदकते देखा था — वह आज कहाँ चली गई?
वह आपके आँगन में रहती है, पर आपने उसका नाम भी कभी नहीं पूछा।
जिसका साथी मरता है, वह अन्न-जल छोड़ देता है — और कुछ ही दिन में दम तोड़ देता है। यह सच्चा प्रेम सिर्फ़ कहानियों में नहीं है।
उन्हें हम 'अशुभ' कहते रहे — और एक दिन वे चले गए। फिर समझ आया, वे ही हमारी असली ढाल थे।
उसके सिर पर ताज है, और कुरान-बाइबल-पुराण तीनों में उसका नाम है।
आपके बचपन में जो पिंजरे में बंद था — आज आज़ाद होकर दिल्ली से चेन्नई तक उड़ रहा है।
वह आपके सिर के ऊपर मँडराता है, हर रोटी पर नज़र रखता है — और दिल्ली में तो वह 'मीट-मार्केट का राजा' है।
नौ रंगों का एक गहना — पर वह कभी सीधा नहीं दिखता।
हवा में दो लंबी सफ़ेद रिबन उड़ती दिखें — चौंकिए मत, यह दूधराज है।
वह कबूतर है, पर ज़मीन पर कभी पैर नहीं रखता — और महाराष्ट्र का गौरव है।
उसके सिर पर पीले रंग की 'दूसरी चोंच' है — जिसे शिकारियों ने 'हाथीदाँत' समझकर मारना शुरू किया था।
हिमालय की बर्फ़ पर अगर कोई इंद्रधनुष चलता मिले — तो वह मोनाल है।
गुलाबी रंग का राज़? वह जो खाते हैं वही बन जाते हैं — सच में।
वह छोटा है, पर बाज़ को भी डरा देता है। उसी कारण किसान उसे 'खेत का कोतवाल' कहते हैं।
रात की सबसे तेज़ आवाज़ — और लोग कहते हैं वह आसमान को टाँग पर थामे हुए है।
गाय जहाँ, बगुला वहाँ — पर क्यों?
हवा में मधुमक्खी पकड़ता है, और पकड़ने से पहले उसका डंक तोड़ देता है।
वह हर शहर में है, पर हम उसे 'आम' कह देते हैं।
गाँव वाले मानते हैं — महोखा का दिखना यानी सौभाग्य की दस्तक।
उसके पंख गुलाबी हैं, सिर पीला — मानो किसी चित्रकार ने जीवित कैनवास बना दिया।
बैठा हो तो भूरा, उड़े तो सफ़ेद — एक पक्षी, दो रूप।
किंगफिशर बीयर के लोगो वाली चिड़िया — पर वह असली में पानी से ज़्यादा खेतों में मिलती है।
हवा में रुक सकता है — हेलीकॉप्टर की तरह। फिर सीधा गोता।
उसकी निचली चोंच ऊपर वाली से लंबी है — क्यों? क्योंकि वह पानी काटकर शिकार करता है।
काली गर्दन, धातु जैसी चमक — और भारत में कुल 1,000 भी नहीं बचे।
एवरेस्ट के ऊपर से उड़ने वाला एकमात्र पक्षी — और वह आपके राज्य के तालाब में आता है।
लोक-मान्यता है — चकवा-चकवी रात भर एक-दूसरे को आवाज़ देते रहते हैं, मिल नहीं पाते।
बौद्ध मानते हैं इसमें छठे दलाई लामा की आत्मा है।
उसकी आवाज़ हँसी जैसी है — पर सुनाई कम होती जा रही है।
दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु — हर महानगर में रहता है, पर हम उसकी ओर देखते भी नहीं।
नाम 'जुजुराना' — पक्षियों का राजा। पर पूरी दुनिया में सिर्फ़ 3,000 बचे।
उसकी चोंच के नीचे बाल्टी जैसी थैली है — और वह उसमें 13 लीटर पानी भर सकता है।
उसकी चोंच कभी पूरी बंद नहीं होती — और यह 'दोष' ही उसकी सबसे बड़ी ताक़त है।
ग्रेटर फ़्लेमिंगो से छोटा, पर रंग में ज़्यादा गहरा गुलाबी।
वह कौवा नहीं — पानी का सबसे फुर्तीला तैराक।
वह कमल के पत्तों पर ऐसे चलती है — मानो पानी पर। और उसके परिवार में मादा 'राजा' होती है।
आपकी प्लेट में जो मुर्गा है, उसका असली पुरखा यही है।
8000 साल पहले इसी से 'चिकन' पैदा हुआ — दुनिया का सबसे लोकप्रिय खाद्य पक्षी।
जंगल के सन्नाटे में अचानक एक 'पट-पट' की मीठी सीटी — और एक नीला रत्न दिखाई देता है।
नर पूरी तरह काला, सिर पर मुकुट — पहाड़ियों का छोटा राजा।
हवा में स्थिर, फिर सीधा गोता — नदी का सबसे शानदार शिकारी।
मिस्र में देवता थे — 'थॉथ'। भारत में अब चुपचाप विलुप्त हो रहे हैं।
विष्णु का वाहन गरुड़ — कई लोग मानते हैं वह यही है।
साँप उसका पसंदीदा भोजन — और कोबरा भी उसके सामने हार जाता है।
वह काली है, पंख कांस्य रंग के, माथे पर लाल कलगी — कमल तालाबों की रानी।
लंबी पतली गुलाबी टाँगें, काले-सफ़ेद शरीर — मानो जलाशय का बैले डांसर।
बैठा हो तो कलाकृति, उड़े तो धमाका।
वह छोटे शिकार को कांटे पर टाँग देता है — और बाद में आराम से खाता है।
हमिंगबर्ड भारत में नहीं, पर यह 'मिनी हमिंगबर्ड' आपके बगीचे में है।
लक्ष्मी का वाहन, पर अंधविश्वास का सबसे बड़ा शिकार।
आँगन के पेड़ पर बैठा छोटा बाज़ — गौरैया भी जिसे देखकर साँस रोक लेती है।
'टुक-टुक-टुक' — गर्मियों की दोपहर में जो लोहार-सी आवाज़ आती है, वह यही है।
पत्तों को सिलकर घर बनाने वाला — प्रकृति का सच्चा दर्ज़ी।
आम के बाग़ में अचानक सूर्य का एक टुकड़ा उड़ता दिखे — वही पीलक है।
लंबी पूँछ हिलाती, झाड़ी से झाड़ी फुदकती — गाँव की सबसे चंचल रानी।
तालाब किनारे काले-सफ़ेद रंग की चिड़िया — पूँछ हिलाती चलती है, मानो रानी हो।
सिर पर मुकुट जैसी कलगी — और चाल ऐसी जैसे राजा टहल रहा हो।
चोंच के ऊपर एक और सींग — और घोंसले में मादा को ख़ुद कैद कर लेना।
बचपन की पहली पहचान — हरा रंग, लाल चोंच और गले में गुलाबी हार।
दुनिया का सबसे ऊँचा उड़ने वाला पक्षी — और प्रेम का सबसे बड़ा प्रतीक।
सुबह 5 बजे की पहली सीटी — और आपका दिन शुरू।
नौ रंगों वाली रहस्यमय चिड़िया — मानसून के साथ आती है, उसी के साथ चली जाती है।