बिहार का राज्य पक्षी — गौरैया (हाउस स्पैरो)
बिहार का राज्य पक्षी गौरैया है — घर-आँगन की वह छोटी चिड़िया जिसकी 'चीं-चीं' बचपन की यादें जगाती है। पिछले 20 सालों में इसकी संख्या 60% तक घट चुकी है।
आम पक्षी, अनोखी कहानी
गौरैया शायद दुनिया की सबसे अधिक इंसान-नज़दीक पक्षी है — 10,000 साल से मानव-बस्तियों के साथ रह रही है। छज्जे, छप्पर, पंखे के पीछे — यह हर जगह घोंसला बनाती है। नर के गले पर काला 'बिब' होता है, मादा में नहीं।
क्यों चुना गया
बिहार सरकार ने 2013 में गौरैया को राज्य पक्षी घोषित किया — इसका उद्देश्य था इस लुप्त होती चिड़िया की रक्षा के प्रति जागरूकता। बिहार की पहचान 'आम आदमी' से जुड़ी है — गौरैया इसका पंख-लगा प्रतीक है।
क्यों घट रही है?
मुख्य कारण — कंक्रीट के घर जिनमें छज्जे और छप्पर नहीं (घोंसले की जगह ख़त्म), कीटनाशकों से भरे अनाज (बच्चों का भोजन ख़त्म), मोबाइल टावर के विकिरण (शोध विवादित पर संकेत हैं), और शहरी शोर। पैक्ड-अनाज ने 'फैलाव' ख़त्म कर दिया — पहले चौकोर बर्तनों में अनाज के दाने गिरते थे, अब पॉलीथीन में।
बचाने के आसान तरीक़े
1) छत या खिड़की पर मिट्टी का बर्तन उल्टा टाँग दें — गौरैया इसमें घोंसला बना लेगी। 2) बाजरा, कँगनी, ज्वार का मिश्रण किसी थाली में सुबह रखें (गेहूँ नहीं — पचता नहीं)। 3) मिट्टी का चौड़ा तसला भरकर पानी रखें। 4) कीटनाशक-मुक्त बालकनी-बगीचा। 5) 20 मार्च को 'World Sparrow Day' — बच्चों को शामिल करें।
बिहार में कहाँ देखें
पटना, गया, मुज़फ़्फ़रपुर के पुराने मुहल्लों में अभी भी काफ़ी हैं। ग्रामीण बिहार — छपरा, बेगूसराय, पूर्णिया — में तो झुंड-के-झुंड मिलते हैं। सुबह और शाम में सबसे सक्रिय।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या घर में गौरैया का घोंसला बनाना शुभ है?
हिंदू परंपरा में इसे बहुत शुभ माना जाता है — यह 'लक्ष्मी का आगमन' कही जाती है। पर्यावरण-दृष्टि से यह भी सच है कि गौरैया घर में हो तो कीट-नियंत्रण मुफ़्त हो जाता है।
गौरैया कैसे वापस लाएँ?
मिट्टी का घड़ा टाँगें, बाजरा-कँगनी का दाना डालें, पानी रखें, कीटनाशक बंद करें। एक बार जोड़ा आ गया तो साल-दर-साल आता रहेगा।
क्या मोबाइल टावर से गौरैया मरती है?
यह वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह सिद्ध नहीं है, पर कई अध्ययन बताते हैं कि उच्च-आवृत्ति विकिरण अंडों की सेट पर असर डाल सकते हैं। इससे बड़ा कारण घोंसले की जगह और भोजन का ख़त्म होना है।
दूसरे राज्यों के पक्षी
- राजस्थान — गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड)
- उत्तर प्रदेश — सारस क्रेन
- उत्तराखंड — हिमालयन मोनाल (मुनाल)
- पंजाब — मोर
- गुजरात — ग्रेटर फ्लेमिंगो (सुरख़ाब)
- असम — सफ़ेद पंख वाली बत्तख
- तमिलनाडु — ज़मरुदी कबूतर (एमराल्ड डव)
- कर्नाटक — इंडियन रोलर (नीलकंठ)
- पश्चिम बंगाल — व्हाइट-थ्रोटेड किंगफ़िशर (किलकिला)
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