असम का राज्य पक्षी — सफ़ेद पंख वाली बत्तख
असम का राज्य पक्षी 'देव-हाँस' या सफ़ेद-पंख वाली वुड-डक — पूर्वोत्तर के घने वर्षा-वनों की छिपी हुई रानी। दुनिया में इनकी संख्या 800 से भी कम है।
पहचान
पूरा शरीर गहरा भूरा-काला, सिर सफ़ेद-धब्बेदार, और उड़ते समय पंख का बड़ा सफ़ेद पैच दिखाई देता है — इसी से नाम पड़ा। नर की चोंच पीली-नारंगी होती है, मादा हल्की। रात में सक्रिय रहती है — इसलिए दिन में दिखना मुश्किल।
आवास
यह बत्तख खुले पानी नहीं, बल्कि सदाबहार वर्षा-वनों के अंदर बहते हुए तालाब-नालों में रहती है — पेड़ों की छाया के नीचे। घोंसला भी बड़े पेड़ के कोटर (tree hollow) में बनाती है — भू-स्तर पर नहीं। यह असामान्य बात है बत्तखों में।
क्यों चुना गया
असम की जैव-विविधता का यह प्रतीक है — नामेरी, दिबरू-सैखोवा, और नामदफ़ा वर्षा-वनों की पहचान। असामी में इसे 'देव-हाँस' (देवताओं की बत्तख) कहते हैं। यह असम की गीली-भूमि और वर्षा-वन संरक्षण की ज़रूरत की जीवंत मिसाल है।
ख़तरा
मुख्य ख़तरा — वर्षा-वनों की कटाई, बागान-खेती का विस्तार, और तेल-गैस खनन। दिबरू-सैखोवा में तेल-रिसाव 2020 में बड़ी घटना थी। शिकार भी होता है क्योंकि माँस की माँग है। दुनिया भर में 800 से कम बचे हैं, जिनमें से ~450 भारत में हैं — असम में सबसे ज़्यादा।
कहाँ देखें
नामेरी नेशनल पार्क (सोनितपुर), दिबरू-सैखोवा (तिनसुकिया), मेहाओ अभयारण्य (अरुणाचल)। सुबह 4-6 बजे नाव से भ्रमण करना पड़ता है क्योंकि दिन में यह गहरे जंगल में छिप जाती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सफ़ेद-पंख वाली बत्तख को 'देव-हाँस' क्यों कहते हैं?
असामी लोक-मान्यता में यह पवित्र पक्षी है — घने जंगल में रहने वाला, कम दिखने वाला, इसलिए 'देवताओं का पक्षी'। पारंपरिक रूप से इसका शिकार वर्जित माना जाता था।
यह अन्य बत्तखों से कैसे अलग है?
अन्य बत्तखें खुले पानी में तैरती हैं, यह जंगल के अंदर बहते नालों में रहती है। घोंसला पेड़ के कोटर में बनाती है, ज़मीन पर नहीं। और यह रात-सक्रिय है।
क्या यह पक्षी विलुप्ति के कगार पर है?
हाँ, IUCN 'Endangered' श्रेणी में है। पूर्वोत्तर के वर्षा-वनों के तेज़ी से सिकुड़ने से इसका अस्तित्व ख़तरे में है।
दूसरे राज्यों के पक्षी
- राजस्थान — गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड)
- उत्तर प्रदेश — सारस क्रेन
- उत्तराखंड — हिमालयन मोनाल (मुनाल)
- पंजाब — मोर
- गुजरात — ग्रेटर फ्लेमिंगो (सुरख़ाब)
- बिहार — गौरैया (हाउस स्पैरो)
- तमिलनाडु — ज़मरुदी कबूतर (एमराल्ड डव)
- कर्नाटक — इंडियन रोलर (नीलकंठ)
- पश्चिम बंगाल — व्हाइट-थ्रोटेड किंगफ़िशर (किलकिला)
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