राजस्थान का राज्य पक्षी — गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड)
राजस्थान का राज्य पक्षी गोडावण है — भारत के सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षियों में से एक, और आज दुनिया की सबसे दुर्लभ प्रजातियों में से एक। थार रेगिस्तान की खुली, सूखी घास-भूमि इसका आख़िरी क़िला है।
पहचान और शरीर
गोडावण की ऊँचाई लगभग 1 मीटर तक होती है और वज़न 15 किलो तक पहुँच सकता है — यह घरेलू टर्की से भी बड़ा है। नर की सिर पर काली टोपी होती है, गर्दन और सीने पर सफ़ेद-भूरी रेखा, और पंख भूरे-मटमैले जो घास में इसे लगभग अदृश्य बना देते हैं। इसकी सबसे बड़ी विशेषता है इसका भारीपन — यह मुश्किल से उड़ता है, ज़्यादातर ज़मीन पर ही चलता है।
आवास और वितरण
एक ज़माने में गोडावण गुजरात से लेकर आंध्र प्रदेश तक पूरे भारत की खुली घास-भूमि में पाया जाता था। आज इसकी बड़ी आबादी सिर्फ़ राजस्थान के जैसलमेर ज़िले के डेज़र्ट नेशनल पार्क में बची है — कच्छ (गुजरात) और आंध्र में गिनी-चुनी संख्या है। यह खुली, कम पेड़ों वाली रेतीली-घास-भूमि पसंद करता है — जहाँ 360° तक ख़तरा देख सके।
क्यों चुना गया राज्य पक्षी
1981 में राजस्थान ने गोडावण को अपना राज्य पक्षी घोषित किया। कारण — यह थार की मिट्टी का अनोखा प्रतीक है, स्थानीय भाषा में इसे 'सोहन चिड़िया', 'गोदाबंद' और 'गोदावण' कहा जाता है। मारवाड़ी लोकगीतों में इसकी शर्मीली चाल का ज़िक्र मिलता है। यह भारत का लगभग हुआ राष्ट्रीय पक्षी बनने वाला था — 1963 में मोर के मुक़ाबले इसका नाम भी सुझाया गया था, पर अंग्रेज़ी नाम 'Bustard' के ग़लत उच्चारण के डर से इसे नकार दिया गया।
क्या ख़तरा है
आज गोडावण की कुल संख्या दुनिया भर में लगभग 150 के आसपास बची है — इंसान के अलावा किसी भी बड़े पक्षी की इससे बदतर हालत नहीं। मुख्य ख़तरे हैं — जैसलमेर के आस-पास लगे हज़ारों किलोमीटर हाई-टेंशन बिजली की तारें (गोडावण की नज़र सामने नहीं, बग़ल में होती है — तार दिखते ही नहीं), आवारा कुत्तों का हमला, अवैध शिकार, और घास-भूमि का खेती में बदलना। सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में आदेश दिया कि तारों को ज़मीन के नीचे डाला जाए, पर काम अभी अधूरा है।
कहाँ देख सकते हैं
डेज़र्ट नेशनल पार्क, जैसलमेर — नवंबर से मार्च के बीच सुबह-सुबह। सैम गाँव के पास 'सुदाश्री' और 'रामदेवरा' के 'क्लोज़र' (बाड़बंद क्षेत्र) में कैप्टिव ब्रीडिंग चल रही है। यहाँ लोकल वन-कर्मी के साथ ही जाना चाहिए — जगह संवेदनशील है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गोडावण क्यों विलुप्त होने के कगार पर है?
मुख्य कारण थार में लगी बिजली की हाई-टेंशन तारें हैं जिनसे टकराकर हर साल दर्जनों पक्षी मर जाते हैं। इसके अलावा घास-भूमि का खेती में परिवर्तन, आवारा कुत्तों का हमला और अवैध शिकार भी बड़े कारण हैं।
क्या गोडावण उड़ सकता है?
हाँ, पर बहुत भारी शरीर के कारण यह सिर्फ़ छोटी-छोटी उड़ानें भर पाता है। ज़्यादातर समय ज़मीन पर ही चलता है और घास में छिपकर शिकार से बचता है।
गोडावण को राष्ट्रीय पक्षी क्यों नहीं बनाया गया?
1963 में इसका नाम सुझाया गया था, पर 'Bustard' शब्द के अंग्रेज़ी उच्चारण (जो एक गाली से मिलता है) के डर से मोर को चुना गया।
दूसरे राज्यों के पक्षी
- उत्तर प्रदेश — सारस क्रेन
- उत्तराखंड — हिमालयन मोनाल (मुनाल)
- पंजाब — मोर
- गुजरात — ग्रेटर फ्लेमिंगो (सुरख़ाब)
- असम — सफ़ेद पंख वाली बत्तख
- बिहार — गौरैया (हाउस स्पैरो)
- तमिलनाडु — ज़मरुदी कबूतर (एमराल्ड डव)
- कर्नाटक — इंडियन रोलर (नीलकंठ)
- पश्चिम बंगाल — व्हाइट-थ्रोटेड किंगफ़िशर (किलकिला)
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