गुजरात का राज्य पक्षी — ग्रेटर फ्लेमिंगो (सुरख़ाब)
गुजरात का राज्य पक्षी ग्रेटर फ्लेमिंगो है — गुलाबी पंखों वाला यह पक्षी हर सर्दी में कच्छ के रण को गुलाबी चादर में बदल देता है। भारत की एकमात्र ब्रीडिंग कॉलोनी यहीं है।
गुलाबी क्यों?
फ्लेमिंगो जन्म से सफ़ेद-भूरे होते हैं। इनके भोजन में शामिल छोटे क्रस्टेशियन और नील-हरित शैवाल (blue-green algae) में कैरोटीन होता है — वही रंग जो गाजर में है। यह कैरोटीन पंखों में जमकर धीरे-धीरे उन्हें गुलाबी बनाता है। जो फ्लेमिंगो चिड़ियाघर में क्रस्टेशियन नहीं खाते, वे सफ़ेद ही रहते हैं।
फ्लेमिंगो सिटी — दुनिया की एक अनोखी जगह
कच्छ के महान रण (Great Rann of Kutch) में लगभग 25,000 फ्लेमिंगो जोड़े हर साल घोंसला बनाते हैं — यह पूरे दक्षिण एशिया की एकमात्र प्राकृतिक ब्रीडिंग कॉलोनी है। स्थानीय लोग इसे 'फ्लेमिंगो सिटी' कहते हैं। घोंसले मिट्टी के छोटे टीले होते हैं जिन पर एक ही अंडा दिया जाता है।
क्यों चुना गया
गुजरात ने फ्लेमिंगो को राज्य पक्षी घोषित किया क्योंकि — भारत की एकमात्र ब्रीडिंग कॉलोनी यहाँ है, यह कच्छ-सौराष्ट्र की पहचान है, और मुंबई की खाड़ी से लेकर नल-सरोवर तक हज़ारों की संख्या में सर्दियों में आते हैं। स्थानीय भाषा में इसे 'हंज' या 'सुरख़ाब' कहते हैं।
कहाँ देखें
नल सरोवर पक्षी अभयारण्य (अहमदाबाद से ~65 किमी) — नवंबर-मार्च के बीच सबसे बेहतरीन। खिजड़िया पक्षी अभयारण्य (जामनगर), फ्लेमिंगो सिटी (कच्छ का रण, नोन-टूरिस्ट क्षेत्र — विशेष अनुमति चाहिए)। थाल के आस-पास की खारी झीलें भी बहुत सक्रिय हैं।
ख़तरे
मुख्य ख़तरे — कच्छ के रण के आस-पास नमक की खेती का विस्तार, अवैध अंडा-संग्रह, और जलवायु परिवर्तन से बारिश के पैटर्न में बदलाव जो ब्रीडिंग-मौसम पर असर डालते हैं। रण-उत्सव के दौरान बढ़ती भीड़ भी विक्षोभ का कारण बनती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
फ्लेमिंगो एक पैर पर क्यों खड़ा होता है?
यह शरीर की ऊष्मा बचाने का तरीक़ा है — पानी में डूबे पैर से गर्मी तेज़ी से निकलती है, इसलिए एक पैर बारी-बारी से मोड़कर पेट के नीचे छिपाया जाता है।
क्या फ्लेमिंगो पूरे साल गुजरात में रहते हैं?
ज़्यादातर आबादी सर्दियों (नवंबर-मार्च) में मध्य एशिया और ईरान से गुजरात आती है। कच्छ के रण की स्थानीय आबादी साल भर रहती है और यहीं ब्रीड करती है।
फ्लेमिंगो कितनी दूर उड़ता है?
एक रात में 600 किमी तक — अच्छी हवा के साथ 65 किमी/घंटा की रफ़्तार से। यह ईरान से गुजरात तक की यात्रा 2-3 रातों में पूरी कर लेते हैं।
दूसरे राज्यों के पक्षी
- राजस्थान — गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड)
- उत्तर प्रदेश — सारस क्रेन
- उत्तराखंड — हिमालयन मोनाल (मुनाल)
- पंजाब — मोर
- असम — सफ़ेद पंख वाली बत्तख
- बिहार — गौरैया (हाउस स्पैरो)
- तमिलनाडु — ज़मरुदी कबूतर (एमराल्ड डव)
- कर्नाटक — इंडियन रोलर (नीलकंठ)
- पश्चिम बंगाल — व्हाइट-थ्रोटेड किंगफ़िशर (किलकिला)
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