पंजाब का राज्य पक्षी — मोर
पंजाब का राज्य पक्षी मोर है — भारत का राष्ट्रीय पक्षी भी। बरसात से पहले खेतों में इसका नाच और तेज़ 'म्याऊँ' पंजाबी लोक-गीतों की जान है।
पंजाब और मोर का रिश्ता
पंजाब में मोर सिर्फ़ पक्षी नहीं, संस्कृति का हिस्सा है। बुल्ले शाह की काफ़ियों में, पंजाबी फुलकारी में, और गुरुद्वारों की सजावट में मोर पंख का प्रतीक बार-बार आता है। किसानों के लिए यह 'बरसात का दूत' है — जिस दिन मोर तेज़ पुकारे, उस हफ़्ते बारिश तय।
क्यों चुना गया
पंजाब ने मोर को अपना राज्य पक्षी घोषित किया — यह राज्य के हर ज़िले में सामान्य रूप से मिलता है, सुरक्षा-कानून सर्वोच्च है (राष्ट्रीय पक्षी), और यह किसानों का साथी है (साँप, कीड़े खाकर खेती की रक्षा करता है)। यह वही राज्य पक्षी है जो एक साथ राष्ट्रीय पक्षी भी है — क़ानूनी सुरक्षा दुहरी।
व्यवहार और पहचान
नर मोर की पूँछ (असल में 'ट्रेन') 150 आँख-जैसे धब्बों वाली होती है — यह पूँछ नहीं, ऊपरी पूँछ-आवरण के पंख हैं। मादा (मोरनी) भूरी और छोटी पूँछ वाली होती है। नाच सिर्फ़ मादा को आकर्षित करने के लिए नहीं — यह क्षेत्र-घोषणा भी है।
क़ानूनी सुरक्षा
मोर Wildlife Protection Act 1972 की Schedule I में है — शिकार, अंग रखना, अंडे लेना — सब कुछ 3-7 साल की क़ैद और 25,000 रुपये तक के जुर्माने का अपराध है। मोर पंख का उपयोग सिर्फ़ प्राकृतिक रूप से गिरे हुए पंख के रूप में क़ानूनी है, वह भी बेचने के लिए नहीं।
पंजाब में कहाँ देखें
छत्तबीर चिड़ियाघर (जीरकपुर) में शहरी दर्शन, हरिके पत्तन वेटलैंड में जंगली मोर, बठिंडा-मुक्तसर का ग्रामीण इलाक़ा जहाँ फ़सली खेतों के किनारे नाचते मिलते हैं। सुबह 5-8 बजे और मानसून-पूर्व मई-जून सबसे अच्छा समय।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या पंजाब में मोर का पंख रखना अपराध है?
पंख यदि प्राकृतिक रूप से गिरा हो और आपने उठाया हो तो व्यक्तिगत रखना क़ानूनी है, पर बेचना/व्यापार करना अवैध है। पूरा पक्षी, अंडा, या मारा गया पंख रखना Schedule I उल्लंघन है।
मोर बारिश में क्यों नाचता है?
यह मादा को आकर्षित करने का प्रजनन-नृत्य है, जो मानसून के साथ मेल खाता है क्योंकि प्रजनन-काल यही होता है। यह मान्यता कि 'मोर आँसू पीता है' सिर्फ़ लोक-कथा है।
पंजाब का राज्य पक्षी क्यों मोर है, कोई विशिष्ट पंजाबी पक्षी क्यों नहीं?
मोर पंजाबी लोक-संस्कृति, फुलकारी, और गुरबाणी के प्रतीक के रूप में गहरा जुड़ा है। साथ ही यह पूरे राज्य में सर्वव्यापी है और सुरक्षा-कानून सर्वोच्च है।
दूसरे राज्यों के पक्षी
- राजस्थान — गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड)
- उत्तर प्रदेश — सारस क्रेन
- उत्तराखंड — हिमालयन मोनाल (मुनाल)
- गुजरात — ग्रेटर फ्लेमिंगो (सुरख़ाब)
- असम — सफ़ेद पंख वाली बत्तख
- बिहार — गौरैया (हाउस स्पैरो)
- तमिलनाडु — ज़मरुदी कबूतर (एमराल्ड डव)
- कर्नाटक — इंडियन रोलर (नीलकंठ)
- पश्चिम बंगाल — व्हाइट-थ्रोटेड किंगफ़िशर (किलकिला)
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