🪶पंख कथा

सारस पक्षी के बारे में जानकारी

सारस (अंग्रेज़ी: Sarus Crane) भारत का सबसे ऊँचा और शायद सबसे रोमांटिक पक्षी है। उत्तर प्रदेश का राज्य पक्षी, प्रेम का प्रतीक और किसानों का सच्चा साथी — सारस की कहानी सिर्फ़ पक्षी विज्ञान नहीं, भावना भी है।

आवाज़ कैसी है: गहरी, तुरही जैसी जोड़ी की पुकार — दूर तक गूँजती है
आवाज़ का विवरण (transcript)

सारस की आवाज़ गहरी, तुरही जैसी जोड़ी की पुकार — दूर तक गूँजती है इस रिकॉर्डिंग में आप उसी विशिष्ट पुकार को साफ़ सुन सकते हैं, जिससे सारस (Sarus Crane) को दूर से भी पहचाना जा सकता है।

रिकॉर्डिंग: Wikimedia Commons (CC-BY-SA)

सारस की पहचान

हल्के स्लेटी रंग का शरीर, गहरे लाल रंग का सिर और गर्दन, लंबी टांगें और 5–6 फीट की ऊँचाई — सारस को पहचानना आसान है। नर और मादा देखने में लगभग एक जैसे होते हैं; नर थोड़ा बड़ा होता है।

सारस की प्रेम कथा

सारस जीवन भर एक ही साथी के साथ रहता है। जोड़े मिलकर नाचते हैं — पंख फैलाते हैं, छलाँग लगाते हैं, और मिलकर एक विशेष पुकार करते हैं जिसे ‘unison call’ कहा जाता है। यदि एक साथी मर जाए तो दूसरा अक्सर अकेले रहता है।

सारस का घर और घोंसला

सारस दलदली ज़मीन, धान के खेत और तालाब के किनारे रहता है। मादा 1–2 बड़े अंडे देती है। दोनों मिलकर अंडे सेते हैं और बच्चों की रक्षा करते हैं।

सारस का संरक्षण

वर्तमान में दुनिया में लगभग 15,000–20,000 सारस ही बचे हैं, जिनमें से अधिकांश उत्तर भारत और नेपाल में हैं। दलदलों का सूखना, बिजली के तार, और कीटनाशक — ये सबसे बड़े ख़तरे हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सारस पक्षी का वैज्ञानिक नाम क्या है?

भारतीय सारस का वैज्ञानिक नाम Antigone antigone है। पहले इसे Grus antigone कहा जाता था।

सारस की ऊँचाई कितनी होती है?

सारस लगभग 5–6 फीट (152–176 सेमी) ऊँचा होता है — यह दुनिया का सबसे ऊँचा उड़ने वाला पक्षी है।

सारस को प्रेम का प्रतीक क्यों कहते हैं?

सारस जीवन भर एक ही साथी के साथ रहता है। यदि साथी की मृत्यु हो जाए तो दूसरा अक्सर खाना-पीना छोड़ देता है — इसलिए इसे ‘प्रेम का प्रतीक’ माना गया।

सारस कहाँ पाया जाता है?

उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र, राजस्थान का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, गुजरात और मध्य प्रदेश के दलदली इलाक़ों में सारस मिलता है। उत्तर प्रदेश का राज्य पक्षी सारस ही है।

सारस की कितनी प्रजातियाँ हैं?

दुनिया में सारस (Crane) की 15 प्रजातियाँ हैं। भारत में मुख्य रूप से तीन — सारस क्रेन, सायबेरियन क्रेन और काली गर्दन वाला सारस (Black-necked Crane)।

क्या सारस संकट में है?

हाँ। IUCN के अनुसार सारस ‘असुरक्षित’ (Vulnerable) श्रेणी में है। दलदलों के सूखने और कीटनाशकों से इसकी संख्या तेज़ी से घट रही है।

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