हुदहुद (Hoopoe) — मुकुट वाली चिड़िया, इसराइल का राष्ट्रीय पक्षी
हुदहुद (अंग्रेज़ी: Common Hoopoe, वैज्ञानिक नाम: Upupa epops) — एक ऐसा पक्षी जिसे देखकर कोई भी रुक जाए। सिर पर पंखों का सुनहरा मुकुट, संतरी शरीर, काली-सफ़ेद धारीदार पंख और लंबी घुमावदार चोंच — मानो किसी चित्रकार ने विशेष रूप से डिज़ाइन किया हो। कुरान में सुलैमान का संदेशवाहक, इसराइल का राष्ट्रीय पक्षी और भारतीय पंजाब का राज्य पक्षी — यह पक्षी दुनिया की कई संस्कृतियों में विशेष स्थान रखता है।
आवाज़ का विवरण (transcript)
हुदहुद की आवाज़ गहरी ‘हूप-हूप-हूप’ — जिसी से इसका नाम पड़ा इस रिकॉर्डिंग में आप उसी विशिष्ट पुकार को साफ़ सुन सकते हैं, जिससे हुदहुद (Common Hoopoe) को दूर से भी पहचाना जा सकता है।
रिकॉर्डिंग: Xeno-canto / Wikimedia Commons (CC-BY-SA)
हुदहुद की पहचान
हुदहुद लगभग 25–32 सेमी लंबा और 46–89 ग्राम का होता है। शरीर हल्का संतरी-गुलाबी, पंख और पूँछ पर काली-सफ़ेद धारियाँ, चोंच लंबी-पतली और नीचे मुड़ी हुई। सबसे ख़ास सिर का ताज (crest) — शांत होने पर पीछे मुड़ा रहता है, उत्तेजना में एकदम पंखे की तरह खुलकर मुकुट-सा दिखता है।
हुदहुद का नाम कहाँ से आया
‘हुदहुद’ नाम इसकी अपनी पुकार ‘हूप-हूप-हूप’ से आया है — जिसे संस्कृत में ‘पुत्रप्रिय’, अरबी में ‘हुदहुद’ और हिंदी में भी वही कहा गया। अंग्रेज़ी नाम ‘Hoopoe’ भी उसी आवाज़ का अनुवाद है।
सुलैमान और हुदहुद की कथा
कुरान की सूरत ‘अन्-नम्ल’ में एक अद्भुत प्रसंग है — हज़रत सुलैमान अपनी सेना में हुदहुद को न देखकर क्रोधित हुए। जब हुदहुद लौटा तो उसने ‘सबा’ (Sheba) की रानी बिलक़ीस के भव्य दरबार की ख़बर सुनाई। सुलैमान ने हुदहुद के हाथों ही रानी को अपना संदेश भेजा। इसी कथा के कारण मुस्लिम परंपरा में हुदहुद ‘बुद्धिमान’, ‘संदेशवाहक’ और ‘आध्यात्मिक’ पक्षी माना गया। सूफ़ी कवि फ़रीदुद्दीन अत्तार की प्रसिद्ध रचना ‘मंतिक़-उत-तैर’ (पक्षियों की सभा) में हुदहुद ही सभी पक्षियों का नेता है।
बदबू की सुरक्षा-कवच
हुदहुद के पास शिकारियों से बचने का अनोखा तरीक़ा है। मादा और चूज़े अपनी पूँछ के पास स्थित ग्रंथि (uropygial gland) से एक तीव्र-गंध वाला तरल निकालते हैं — इतना बदबूदार कि सर्प, नेवला और शिकारी पक्षी घोंसले के पास आते ही नहीं। चूज़े ख़तरा महसूस होने पर हमलावर पर सीधे बदबूदार तरल-मल छिड़क देते हैं।
खान-पान और घोंसला
हुदहुद ज़मीन पर चलते हुए लंबी चोंच से कीड़े खोदकर खाता है — दीमक, टिड्डे, केंचुए, कैटरपिलर। यह पेड़ के खोखले तने या मिट्टी की दीवार के छेद में घोंसला बनाता है। मादा 5–7 अंडे देती है। बच्चों को केवल मादा सेती है — उस दौरान नर भोजन लाकर देता है।
सांस्कृतिक महत्व
मिस्री कब्रों की दीवार-पेंटिंग में 3000 साल पहले भी हुदहुद के चित्र मिले हैं। यूनान के दार्शनिक अरस्तू ने इसे ‘राजा-पक्षी’ कहा। भारत में यह पंजाब का राज्य पक्षी है और उत्तराखंड-हिमाचल के लोक-गीतों में ‘सिर पर मुकुट वाली सुंदरी’ के रूप में गाया जाता है। शकुन-शास्त्र में हुदहुद का दिखना शुभ माना गया है।
संरक्षण की स्थिति
हुदहुद IUCN की Least Concern श्रेणी में है — यानी अभी संकट में नहीं। लेकिन खेतों में कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग और खोखले पेड़ों की कटाई से इसकी संख्या शहरों के आसपास कम हो रही है। अपने बग़ीचे में पुराना पेड़ बचाएँ और कीटनाशक कम करें — हुदहुद लौट आएगा।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हुदहुद पक्षी कैसा दिखता है?
हुदहुद संतरी-भूरे रंग का, काली-सफ़ेद पट्टियों वाले पंख, लंबी नीचे-मुड़ी चोंच और सबसे ख़ास — सिर पर पंखों का ताज (crest) जिसे यह ख़तरे या उत्तेजना में पंखे की तरह खोल देता है।
हुदहुद कहाँ मिलता है?
पूरे भारत में — गाँव के मैदानी इलाक़े, बग़ीचे, खेत, पार्क। शहरों की खुली ज़मीन पर भी अकेला दिख जाता है। सर्दियों में हिमालय की तराई से मैदानी क्षेत्रों में आ जाता है।
हुदहुद और सुलैमान की क्या कथा है?
इस्लामिक परंपरा में हज़रत सुलैमान (Solomon) ने हुदहुद को अपना संदेशवाहक बनाया था। कुरान की सूरत अन्-नम्ल में हुदहुद ‘सबा’ की रानी बिलक़ीस की ख़बर सुलैमान तक पहुँचाता है। इसी कारण मुस्लिम परंपरा में हुदहुद को ‘बुद्धिमान पक्षी’ माना जाता है।
क्या हुदहुद किसी राज्य/देश का राष्ट्रीय पक्षी है?
हुदहुद इसराइल का राष्ट्रीय पक्षी (2008 से) है। भारत में यह पंजाब का राज्य पक्षी है।
हुदहुद क्या खाता है?
हुदहुद ज़मीन पर चलते हुए लंबी चोंच से कीड़े, केंचुए, दीमक, टिड्डे और छोटे रीढ़-रहित जीव खोदकर खाता है। यह किसान का बड़ा मित्र है — फ़सल के हानिकारक कीड़ों को ख़त्म करता है।
हुदहुद के घोंसले से बदबू क्यों आती है?
मादा हुदहुद अपनी पूँछ के पास से एक ख़ास तेल-नुमा तरल निकालती है जिसकी गंध सड़े मांस जैसी होती है। यह गंध घोंसले में सर्प, चूहे और शिकारी पक्षियों को दूर रखती है। चूज़े भी अगर ख़तरा महसूस करें तो बदबूदार गीला मल शिकारी पर छिड़क देते हैं।