गौरैया के बारे में जानकारी

गौरैया (अंग्रेज़ी: House Sparrow, वैज्ञानिक नाम: Passer domesticus) कभी हर भारतीय घर के आँगन की पहली मेहमान थी। दादी की रसोई से गिरते दानों पर चहचहाती, छप्पर में घोंसला बनाती — आज वही गौरैया शहरों से लगभग ग़ायब है। यह सिर्फ़ एक पक्षी की कहानी नहीं, हमारे बचपन के जाने की कहानी है।
आवाज़ का विवरण (transcript)
गौरैया की आवाज़ तेज़, चहचहाती ‘चीं-चीं-चीं’ — झुंड में सबसे जानी-पहचानी आवाज़ इस रिकॉर्डिंग में आप उसी विशिष्ट पुकार को साफ़ सुन सकते हैं, जिससे गौरैया (House Sparrow) को दूर से भी पहचाना जा सकता है।
रिकॉर्डिंग: Wikimedia Commons (CC-BY-SA)
गौरैया की पहचान
गौरैया लगभग 15 सेमी लंबी और 25–40 ग्राम वजन की होती है। नर के सिर पर भूरे रंग की टोपी, गालों पर सफ़ेद धब्बा और गले पर काला तिकोना ‘बिब’ होता है। मादा हल्के भूरे रंग की होती है — पहचानने में मुश्किल, पर बेहद प्यारी।
गौरैया कहाँ रहती है
गौरैया मनुष्यों के साथ रहने वाली पक्षी है — गाँव, क़स्बे, पुराने मोहल्लों में पाई जाती है। पक्के, बंद घरों में इसे घोंसला बनाने की जगह नहीं मिलती, इसलिए यह आधुनिक शहरों से सिकुड़ती जा रही है।
घटती संख्या — असली वजह
1. मोबाइल टॉवर की तरंगें गौरैया के नेविगेशन को बिगाड़ती हैं। 2. कीटनाशकों से छोटे कीड़े — बच्चों का भोजन — ख़त्म हो रहे हैं। 3. सीसा-रहित पेट्रोल के धुएँ में मौजूद रासायन इसके लिए ज़हरीले हैं। 4. पुराने रोशनदान, ढाँचे और छप्पर ग़ायब हो रहे हैं।
गौरैया को घर बुलाएँ — 5 आसान काम
बालकनी में मिट्टी का सकोरा रखें — पानी और बाजरा भरें। लकड़ी के घोंसले-बक्से (nest box) लगाएँ — Amazon/Flipkart पर ₹200 में मिलते हैं। आँगन में 1 तुलसी का पौधा लगाएँ — कीड़े आएँगे, गौरैया आएगी। कीटनाशकों का प्रयोग बंद करें। बच्चों को सिखाएँ कि गौरैया हमारी मित्र है।
विश्व गौरैया दिवस — 20 मार्च
नासिक के मोहम्मद दिलावर ने 2010 में विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत की। आज भारत के कई राज्यों में स्कूल इस दिन गौरैया-संरक्षण की प्रतिज्ञा लेते हैं। दिल्ली ने गौरैया को अपना राज्य पक्षी भी घोषित किया है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गौरैया का वैज्ञानिक नाम क्या है?
गौरैया का वैज्ञानिक नाम Passer domesticus है। यह दुनिया भर में पाई जाने वाली सबसे आम पक्षी प्रजातियों में से एक थी।
गौरैया विलुप्त क्यों हो रही है?
मोबाइल टॉवर की तरंगें, सीसा-रहित पेट्रोल, कीटनाशकों से कीड़ों का घटना, पक्के मकानों में घोंसले की जगह न मिलना — ये मुख्य कारण हैं।
विश्व गौरैया दिवस कब मनाया जाता है?
हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस (World Sparrow Day) मनाया जाता है ताकि लोग गौरैया के संरक्षण के लिए जागरूक हों।
गौरैया को घर बुलाने के लिए क्या करें?
बालकनी या आँगन में मिट्टी का बर्तन रखें जिसमें पानी और बाजरा/चावल हो। पुराने डिब्बे या लकड़ी के घोंसले-बक्से लगाएँ। कीटनाशक से बचें।
गौरैया की उम्र कितनी होती है?
जंगल में गौरैया की औसत उम्र 3 साल होती है, पर अनुकूल परिस्थितियों में यह 5–7 साल तक भी जी सकती है।
गौरैया क्या खाती है?
गौरैया मुख्य रूप से अनाज (बाजरा, चावल, गेहूँ), छोटे कीड़े और पत्तियाँ खाती है। बच्चों को कीड़े-मकोड़े ही खिलाए जाते हैं।