🪶पंख कथा

मोर पर निबंध — 10 लाइन, 100, 200 और 500 शब्दों में

मोर हमारा राष्ट्रीय पक्षी है और हर स्कूल में बच्चों को कक्षा 1 से ही मोर पर निबंध लिखने को दिया जाता है। इस पेज पर आपको 10 लाइन, 100 शब्द, 200 शब्द और 500 शब्दों में — चारों तरह से — मोर पर निबंध मिलेगा। सारी जानकारी सरल हिंदी में है और परीक्षा या प्रोजेक्ट के लिए सीधे इस्तेमाल की जा सकती है।

मोर पर 10 लाइन का निबंध (कक्षा 1-3)

(1) मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है। (2) इसका वैज्ञानिक नाम Pavo cristatus है। (3) मोर बहुत सुंदर पक्षी है। (4) इसके पंख नीले-हरे रंग के चमकीले होते हैं। (5) मोर के सिर पर छोटा-सा मुकुट होता है। (6) मानसून आने पर मोर पंख फैलाकर नाचता है। (7) मोरनी भूरे रंग की और थोड़ी छोटी होती है। (8) मोर अनाज, कीड़े, फल और छोटे साँप खाता है। (9) 26 जनवरी 1963 को मोर को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया। (10) मोर हम सब भारतीयों का गौरव है।

मोर पर निबंध — 100 शब्दों में (कक्षा 4-5)

मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है। इसका रंग-बिरंगा शरीर और लंबी पूँछ इसे दुनिया के सबसे सुंदर पक्षियों में शामिल करती है। नर मोर के पंख गहरे नीले-हरे होते हैं और हर पंख पर एक आँख जैसा निशान होता है। मानसून के मौसम में मोर अपने पंख फैलाकर नाचता है — यह दृश्य बहुत मनमोहक होता है। मोर सर्वाहारी पक्षी है — यह अनाज, कीड़े, फल और छोटे साँप खाता है। भारत सरकार ने 26 जनवरी 1963 को मोर को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया। मोर हमारी संस्कृति का प्रतीक है और भारतीय वन्यजीव अधिनियम 1972 के तहत इसकी रक्षा की जाती है।

मोर पर निबंध — 200 शब्दों में (कक्षा 6-8)

मोर (वैज्ञानिक नाम: Pavo cristatus) भारत का राष्ट्रीय पक्षी है। यह अपनी सुंदरता और नाच के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। नर मोर लगभग 100 से 115 सेंटीमीटर लंबा होता है और इसका वज़न 4 से 6 किलो तक होता है। इसका सिर, गर्दन और छाती गहरे नीले रंग की होती है। पीठ पर हरे और सुनहरे पंख होते हैं, और सबसे ख़ास होते हैं 200 से अधिक लंबे पंख जिन्हें 'ट्रेन' कहते हैं। मोरनी मटमैले भूरे रंग की होती है ताकि अंडे सेते समय वह मिट्टी में छिपी रह सके। मानसून के मौसम (जुलाई से सितंबर) में नर मोर अपने पंख फैलाकर मोरनी को आकर्षित करने के लिए नाचता है। मोर सर्वाहारी है — अनाज, फल, कीड़े-मकौड़े, छिपकलियाँ और छोटे साँप तक खा जाता है। यही कारण है कि जहाँ मोर रहते हैं वहाँ साँप कम पाए जाते हैं। मोर पूरे भारत में मिलता है और भारतीय वन्यजीव अधिनियम 1972 की अनुसूची-I में इसकी रक्षा की गई है। 26 जनवरी 1963 को भारत सरकार ने मोर को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया। मोर सिर्फ़ एक पक्षी नहीं, हमारी संस्कृति और गौरव का प्रतीक है।

मोर पर निबंध — 500 शब्दों में (कक्षा 9-10)

मोर, जिसका वैज्ञानिक नाम Pavo cristatus है, भारत का राष्ट्रीय पक्षी है। यह अपनी अद्वितीय सुंदरता, चमकीले रंगों और मनमोहक नाच के लिए विश्व-प्रसिद्ध है। भारत सरकार ने 26 जनवरी 1963 को मोर को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया — इसके पीछे कारण थे मोर की पूरे देश में उपस्थिति, इसकी सांस्कृतिक-धार्मिक महत्ता, और इसका बच्चों से लेकर बुज़ुर्गों तक सभी को आकर्षित करना। नर मोर लगभग 100–115 सेंटीमीटर लंबा और 4–6 किलो वज़न का होता है। इसका सिर, गर्दन और छाती गहरे नीले रंग की चमकीली होती है। सिर पर एक छोटी-सी कलगी होती है जिसे 'मुकुट' कहा जाता है। पीठ पर हरे-सुनहरे पंख होते हैं और सबसे विशेष होते हैं 200 से अधिक लंबे 'ट्रेन-पंख' — जिन पर आँख जैसे रंग-बिरंगे निशान होते हैं, जिन्हें 'चंद्रक' कहा जाता है। ये रंग किसी रंग से नहीं, बल्कि प्रकाश के बिखरने (structural colour) से बनते हैं, इसलिए कोण बदलने पर रंग भी बदलता दिखता है। मोरनी छोटी और मटमैले भूरे रंग की होती है — यह छलावरण है ताकि वह अंडे सेते समय शिकारियों की नज़र से बच सके। मानसून के मौसम में जब बादल घिरते हैं, नर मोर अपने पंख फैलाकर मोरनी के सामने नाचता है। यह प्रजनन का हिस्सा है और यही दृश्य भारतीय कवियों-चित्रकारों को सदियों से प्रेरित करता रहा है। मोर सर्वाहारी है — अनाज, फल, कीड़े-मकौड़े, छिपकलियाँ, छोटे साँप और बिच्छू तक खा जाता है। इस कारण यह किसान का मित्र माना जाता है क्योंकि यह फ़सलों को खाने वाले कीटों और खेत में आने वाले साँपों को नियंत्रित करता है। भारतीय संस्कृति में मोर का विशेष स्थान है। भगवान कार्तिकेय का वाहन मोर है, भगवान कृष्ण अपने मुकुट में मोर-पंख धारण करते हैं, और मोर 'सरस्वती' के साथ भी जुड़ा है। मुगल शासकों ने 'तख़्त-ए-ताउस' (मयूर सिंहासन) बनवाया था — जिसका नाम मोर पर ही रखा गया। लोकगीतों, कढ़ाई, चित्रकला और नृत्य में मोर आज भी छाया हुआ है। मोर पूरे भारत में — राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश से लेकर दक्षिण भारत तक — मिलता है। यह श्रीलंका और नेपाल में भी पाया जाता है। भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-I में इसे रखा गया है, यानी मोर का शिकार, खरीद-बिक्री और पंखों का व्यापार क़ानूनन अपराध है। हालाँकि, प्राकृतिक रूप से गिरे पंख उठाने की छूट है। निष्कर्ष के तौर पर, मोर सिर्फ़ एक पक्षी नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। इसकी सुंदरता, इसका नाच, इसकी उपयोगिता और इसकी सांस्कृतिक विरासत इसे राष्ट्रीय पक्षी बनने के हर पैमाने पर खरा उतारते हैं। हमारा कर्तव्य है कि हम इसकी रक्षा करें और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी विरासत पहुँचाएँ।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोर पर 10 लाइन कैसे लिखें?

10 लाइन में लिखें — (1) मोर भारत का राष्ट्रीय पक्षी है। (2) इसका वैज्ञानिक नाम Pavo cristatus है। (3) यह बहुत सुंदर पक्षी है। (4) इसके पंख नीले-हरे रंग के होते हैं। (5) मोर मानसून में नाचता है। (6) मोरनी भूरे रंग की होती है। (7) मोर अनाज, कीड़े और छोटे साँप खाता है। (8) मोर 20 साल तक जीता है। (9) 26 जनवरी 1963 को इसे राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया। (10) मोर हमारी संस्कृति की शान है।

मोर को राष्ट्रीय पक्षी कब घोषित किया गया?

भारत सरकार ने 26 जनवरी 1963 को मोर को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया था।

मोर के पंख किस रंग के होते हैं?

नर मोर के पंख गहरे नीले, हरे, सुनहरे और बैंगनी रंग के होते हैं। हर पंख पर एक आँख जैसा निशान होता है जिसे 'चंद्रक' कहते हैं।

मोर पर निबंध क्यों लिखवाया जाता है?

मोर हमारे राष्ट्रीय प्रतीकों में से एक है और भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। इसलिए स्कूल में बच्चों को छोटी कक्षा से ही मोर पर निबंध लिखवाया जाता है ताकि वे अपने राष्ट्रीय पक्षी को जानें।

मोर कहाँ रहता है?

मोर पूरे भारत में खुले खेतों, हल्के जंगलों और गाँव के आस-पास रहता है। यह पेड़ों पर सोता है और ज़मीन पर भोजन ढूँढ़ता है।

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