🪶पंख कथा

भारत के विलुप्तप्राय पक्षी — 12 प्रजातियाँ जो ख़तरे में हैं

भारत के विलुप्तप्राय पक्षी — 12 प्रजातियाँ जो ख़तरे में हैं — हिंदी में विस्तृत जानकारी और तस्वीर

भारत की लगभग 100 पक्षी प्रजातियाँ IUCN की ख़तरे वाली श्रेणियों में हैं। कुछ की संख्या तो सैकड़ों में नहीं, दहाइयों में रह गई है। यह लेख उन प्रजातियों, उनके ख़तरों और चल रही संरक्षण-कोशिशों का सीधा-सादा ब्योरा है — प्रतियोगी परीक्षाओं और स्कूल प्रोजेक्ट, दोनों के लिए उपयोगी।

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण)

राजस्थान का राज्य पक्षी और भारत का सबसे संकटग्रस्त बड़ा पक्षी — जंगल में लगभग 150 से भी कम बचे हैं। सबसे बड़ा ख़तरा बिजली की हाई-टेंशन तारें हैं, जिनसे टकराकर हर साल कई मौतें होती हैं। डेज़र्ट नेशनल पार्क (जैसलमेर) में प्रजनन-केंद्र और तारों पर 'बर्ड डाइवर्टर' लगाने की योजनाएँ चल रही हैं।

गिद्ध — 99% गिरावट

1990 के दशक में भारत के गिद्धों की आबादी 99% से ज़्यादा गिर गई। कारण था डाइक्लोफ़ेनैक — पशुओं को दी जाने वाली दर्द-निवारक दवा, जिसका अवशेष मरे हुए मवेशी खाने वाले गिद्ध के गुर्दे नष्ट कर देता था। 2006 में पशु-चिकित्सा में इसके इस्तेमाल पर रोक लगी और अब हरियाणा के पिंजौर सहित कई प्रजनन-केंद्रों से गिद्ध जंगल में छोड़े जा रहे हैं।

बंगाल फ़्लोरिकन और लेसर फ़्लोरिकन

बंगाल फ़्लोरिकन के भारत में 350 से भी कम बचे हैं, मुख्यतः असम के मानस और काज़ीरंगा के घास-मैदानों में। लेसर फ़्लोरिकन (खरमोर) गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के घास-मैदानों में मिलता है। दोनों का ख़तरा एक ही है — घास-मैदानों को 'बंजर भूमि' मानकर उनका खेती या उद्योग में बदल दिया जाना।

अन्य संकटग्रस्त प्रजातियाँ

जर्डन कोर्सर (आंध्र प्रदेश, अत्यंत दुर्लभ), फ़ॉरेस्ट आउलेट (मध्य भारत, 100 साल तक विलुप्त माना गया), व्हाइट-बेलीड हेरॉन, स्पून-बिल्ड सैंडपाइपर, ब्लैक-बेलीड टर्न, सारस क्रेन (Vulnerable), और साइबेरियन क्रेन — जिसकी पश्चिमी आबादी भारत आना पूरी तरह बंद कर चुकी है।

मुख्य ख़तरे

आवास का नुक़सान (नमभूमि और घास-मैदान सबसे ज़्यादा), कीटनाशक, बिजली की तारें और पवन-चक्कियाँ, अवैध शिकार और पालतू-व्यापार, तथा जलवायु परिवर्तन से प्रजनन-चक्र का बिगड़ना। भारत में 'घास-मैदान' को कानूनी रूप से जंगल का दर्जा न मिलना एक बड़ी नीतिगत कमी मानी जाती है।

क्या किया जा रहा है और आप क्या कर सकते हैं

प्रजाति-पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम, वन्यजीव अधिनियम 1972 की अनुसूची-I संरक्षण, गिद्ध-सुरक्षित क्षेत्र और डाइक्लोफ़ेनैक पर प्रतिबंध — ये बड़े क़दम हैं। आप eBird पर अपनी सूची दर्ज कर सकते हैं, डाइक्लोफ़ेनैक की जगह मेलॉक्सिकैम के इस्तेमाल की जानकारी पशुपालकों तक पहुँचा सकते हैं, और घास-मैदानों को 'बंजर' कहने वाली भाषा को चुनौती दे सकते हैं।

✍️ संपादकीय और तथ्य-जाँच नीति

पंख कथा के हर लेख की जानकारी कम-से-कम तीन स्वतंत्र स्रोतों से जाँची जाती है — Bombay Natural History Society (BNHS), eBird / Cornell Lab, और IUCN Red List। स्थानीय लोक-कथाएँ क्षेत्रीय स्रोतों से लेकर स्पष्ट रूप से चिह्नित की जाती हैं। यदि आपको कोई त्रुटि दिखे तो हमें बताइए।

पूरी संपादकीय नीति →छवि/ऑडियो साभार →हमारे बारे में →त्रुटि रिपोर्ट करें →

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का सबसे संकटग्रस्त पक्षी कौन-सा है?

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (गोडावण) — जंगल में लगभग 150 से भी कम बचे हैं।

भारत में गिद्ध क्यों ख़त्म हुए?

पशुओं को दी जाने वाली डाइक्लोफ़ेनैक दवा के अवशेष से, जो मरे हुए मवेशी खाने वाले गिद्धों के गुर्दे नष्ट कर देती थी।

क्या साइबेरियन क्रेन अब भारत आता है?

नहीं, पश्चिमी आबादी लगभग समाप्त हो चुकी है; भरतपुर में आख़िरी नियमित दर्शन 2002 में हुआ था।

गोडावण को बचाने के लिए क्या हो रहा है?

जैसलमेर में प्रजनन-केंद्र, हाई-टेंशन तारों पर बर्ड डाइवर्टर और कुछ इलाक़ों में तारों को भूमिगत करने की योजना।

आम नागरिक कैसे मदद कर सकता है?

eBird पर दर्शन दर्ज करना, नमभूमि-घास-मैदान बचाने की स्थानीय मुहिम से जुड़ना और पशु-चिकित्सा में सुरक्षित दवाओं की जानकारी फैलाना।

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