राजहंस (फ्लेमिंगो) — गुलाबी पक्षी की पूरी जानकारी

गुलाबी क़तार में खड़े, एक टाँग पर संतुलन साधे फ्लेमिंगो भारत की नमभूमियों का सबसे नाटकीय दृश्य हैं। हिंदी में इन्हें 'राजहंस' कहा जाता है। मुंबई की खाड़ी से लेकर कच्छ के रण तक हर सर्दी लाखों की संख्या में ये पक्षी उतरते हैं।
पहचान — दो प्रजातियाँ
भारत में दो प्रजातियाँ मिलती हैं। ग्रेटर फ्लेमिंगो बड़ा (1.5 मीटर तक), हल्का गुलाबी-सफ़ेद और उसकी चोंच गुलाबी-काली नोक वाली होती है। लेसर फ्लेमिंगो छोटा, गहरा गुलाबी और गहरी लाल चोंच वाला होता है। दोनों ही एक टाँग पर खड़े होकर आराम करते हैं — यह मुद्रा शरीर की गर्मी बचाने में मदद करती है।
गुलाबी रंग का राज़
फ्लेमिंगो जन्म से सफ़ेद-भूरा होता है। इसका गुलाबी रंग भोजन से आता है — नमकीन पानी में मौजूद स्पाइरुलिना शैवाल और छोटे झींगों में कैरोटिनॉयड नामक रंगद्रव्य होता है, जो पंखों में जमा होकर उन्हें गुलाबी बना देता है। जिस फ्लेमिंगो का भोजन कमज़ोर हो, उसका रंग फीका रह जाता है — और मादा गहरे रंग के नर को प्राथमिकता देती है।
उल्टी चोंच से भोजन
फ्लेमिंगो सिर को उल्टा करके चोंच पानी में डुबोता है और छननी की तरह पानी खींचकर शैवाल व छोटे जीव छान लेता है। इसकी जीभ पंप की तरह काम करती है और चोंच के भीतर बालों जैसी संरचनाएँ (lamellae) छलनी बनाती हैं। यह दुनिया के गिने-चुने 'फ़िल्टर फ़ीडर' पक्षियों में है।
भारत में कहाँ और कब
मुंबई का सेवरी-थाणे क्रीक (नवंबर–मई), गुजरात का कच्छ का रण — जहाँ 'फ्लेमिंगो सिटी' में लाखों घोंसले बनते हैं, खिजड़िया और नल सरोवर, तमिलनाडु का पॉइंट कैलिमेरे और पुलिकट, तथा ओडिशा की चिलिका झील। कच्छ का महान रण दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा फ्लेमिंगो-प्रजनन स्थल है।
घोंसला और चूज़े
फ्लेमिंगो कीचड़ का शंकु-आकार टीला बनाकर उस पर एक अंडा देता है। दोनों माता-पिता 'क्रॉप मिल्क' नामक लाल-गुलाबी तरल से चूज़े को पालते हैं। चूज़े कुछ दिनों बाद हज़ारों की संख्या में 'क्रेश' यानी सामूहिक नर्सरी बनाते हैं, जिनकी देखरेख कुछ वयस्क करते हैं — और माता-पिता अपने चूज़े को उसकी आवाज़ से भीड़ में पहचान लेते हैं।
ख़तरे और संरक्षण
नमभूमियों पर निर्माण, तेल-रिसाव, प्रदूषण और पर्यटन का दबाव मुख्य ख़तरे हैं। मुंबई में थाणे क्रीक फ्लेमिंगो अभयारण्य इसी वजह से बनाया गया। देखने जाएँ तो 100 मीटर से ज़्यादा नज़दीक न जाएँ, ड्रोन न उड़ाएँ और झुंड को उड़ाने के लिए ताली या शोर बिल्कुल न करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
फ्लेमिंगो को हिंदी में क्या कहते हैं?
राजहंस। कुछ क्षेत्रों में इसे 'बड़ा हंस' या 'बोग हंस' भी कहा जाता है।
फ्लेमिंगो गुलाबी क्यों होता है?
उसके भोजन (शैवाल और छोटे झींगे) में मौजूद कैरोटिनॉयड रंगद्रव्य पंखों में जमा होकर गुलाबी रंग देता है।
मुंबई में फ्लेमिंगो कब दिखते हैं?
नवंबर से मई तक, सेवरी जेट्टी और थाणे क्रीक में; चरम फ़रवरी–अप्रैल में रहता है।
फ्लेमिंगो एक टाँग पर क्यों खड़ा होता है?
इससे शरीर की गर्मी कम निकलती है और मांसपेशियों पर ज़ोर भी कम पड़ता है — यह उनके लिए आरामदायक मुद्रा है।
भारत में फ्लेमिंगो कहाँ प्रजनन करते हैं?
मुख्यतः गुजरात के कच्छ के महान रण में, जिसे 'फ्लेमिंगो सिटी' कहा जाता है।