🪶पंख कथा

गौरैया कैसे बचाएँ — घोंसला, दाना और 7 आसान क़दम

गौरैया कैसे बचाएँ — घोंसला, दाना और 7 आसान क़दम — हिंदी में विस्तृत जानकारी और तस्वीर

गौरैया कहीं गई नहीं — उसका घर छिन गया। काँच-कंक्रीट की चिकनी इमारतों में वे दरारें और रोशनदान ही नहीं बचे जहाँ वह घोंसला बनाती थी। अच्छी ख़बर यह है कि गौरैया लौट आती है, और बहुत जल्दी लौटती है, बशर्ते उसे तीन चीज़ें मिल जाएँ — सुरक्षित घोंसला, बारीक दाना और साफ़ पानी।

गौरैया क्यों घटी

मुख्य कारण चार हैं — घोंसले की जगहों का ख़त्म होना, कीटनाशकों से चूज़ों का भोजन (छोटे कीड़े) ग़ायब होना, बग़ीचों की जगह पक्की टाइलें, और सस्ते पैक-किए दानों में विविधता की कमी। मोबाइल टावर के विकिरण वाली बात लोकप्रिय ज़रूर है, पर उस पर वैज्ञानिक सहमति नहीं है — प्रमाण घोंसला-हानि की ओर कहीं ज़्यादा मज़बूती से इशारा करते हैं।

घोंसला-बॉक्स का सही नाप

लकड़ी का बॉक्स 12×12 सेमी आधार और 20 सेमी ऊँचाई का बनवाइए, प्रवेश-छेद ठीक 3.2 सेमी रखिए — इससे बड़ा छेद रखने पर मैना और कबूतर क़ब्ज़ा कर लेते हैं। अंदर कोई पेंट या पॉलिश नहीं। ढक्कन खुलने वाला हो ताकि साल में एक बार (प्रजनन के बाद) सफ़ाई हो सके। बॉक्स को 8–10 फ़ुट ऊँचाई पर, बारिश-धूप से बचाकर, पूर्व या उत्तर दिशा में लगाइए।

कौन-सा दाना

गौरैया के वयस्क बीज खाते हैं पर चूज़े केवल कीड़े खाते हैं। इसलिए बाजरा, कंगनी और ज्वार के साथ-साथ बालकनी में तुलसी, गेंदा या कोई भी फूलदार देसी पौधा लगाइए जिस पर छोटे कीड़े आएँ। कीटनाशक का छिड़काव पूरी तरह बंद कर देना अकेले में सबसे बड़ा फ़र्क़ डालता है।

7 आसान क़दम

1) घोंसला-बॉक्स लगाइए। 2) मिट्टी का सकोरा रखिए। 3) बारीक दाना दीजिए। 4) कीटनाशक बंद कीजिए। 5) एक देसी पौधा लगाइए। 6) बिल्ली को बालकनी से दूर रखिए। 7) पड़ोसियों को भी जोड़िए — गौरैया झुंड में रहने वाला पक्षी है, इसलिए अकेली बालकनी से ज़्यादा असर पूरे मोहल्ले की कोशिश का होता है।

क्या न करें

घोंसले में झाँकना, तस्वीर के लिए फ़्लैश चलाना, बॉक्स को बार-बार हिलाना या चूज़े को छूना — ये सब माता-पिता को घोंसला छोड़ने पर मजबूर कर देते हैं। गिरे हुए चूज़े को उठाकर घर मत लाइए; अगर पंख आ चुके हैं तो वह उड़ना सीख रहा है और माता-पिता आसपास ही हैं।

विश्व गौरैया दिवस

हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत भारत के नेचर फ़ॉरएवर सोसाइटी ने की थी। यही दिन स्कूलों और सोसाइटियों में घोंसला-बॉक्स बाँटने के लिए सबसे अच्छा मौक़ा है, क्योंकि मार्च–अगस्त गौरैया का प्रजनन-काल है।

✍️ संपादकीय और तथ्य-जाँच नीति

पंख कथा के हर लेख की जानकारी कम-से-कम तीन स्वतंत्र स्रोतों से जाँची जाती है — Bombay Natural History Society (BNHS), eBird / Cornell Lab, और IUCN Red List। स्थानीय लोक-कथाएँ क्षेत्रीय स्रोतों से लेकर स्पष्ट रूप से चिह्नित की जाती हैं। यदि आपको कोई त्रुटि दिखे तो हमें बताइए।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गौरैया घोंसला-बॉक्स में कितने दिन में आती है?

अगर आसपास गौरैया मौजूद है तो 2 हफ़्ते से 3 महीने के बीच। प्रजनन-काल (मार्च–अगस्त) में सबसे जल्दी आती है।

गौरैया एक बार में कितने अंडे देती है?

आम तौर पर 3–5 अंडे, जो 11–14 दिन में फूटते हैं। साल में 2–3 बार प्रजनन होता है।

क्या मोबाइल टावर गौरैया के ग़ायब होने की वजह हैं?

इस पर कोई वैज्ञानिक सहमति नहीं है। घोंसले की जगहों का ख़त्म होना और कीटनाशकों से कीड़ों की कमी — ये दो कारण कहीं ज़्यादा प्रमाणित हैं।

घोंसला-बॉक्स कब साफ़ करें?

प्रजनन-काल पूरा होने के बाद, यानी सितंबर–अक्टूबर में, साल में एक बार। पुराना घास-फूस हटाकर सूखे कपड़े से पोंछ दीजिए।

क्या फ़्लैट में रहकर भी गौरैया बुलाई जा सकती है?

हाँ। दूसरी–दसवीं मंज़िल तक की बालकनियों में भी गौरैया घोंसला बनाती है, बशर्ते बॉक्स, पानी और दाना तीनों मौजूद हों।

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